दिल्ली में 15 साल तक लगातार मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित (Sheila Dikshit) के हाथों में एक बार फिर प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी गई है. शीला दीक्षित को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के पीछे कांग्रेस की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है. शीला में एक साथ कई खूबियां हैं, वे पंजाबी हैं और पूर्वांचली भी हैं. इसके साथ महिला और ब्राह्मण तो हैं ही. इतना ही नहीं आज भी दिल्ली में कांग्रेस के बाकी नेताओं में उनकी स्वीकार्यकता रेप केस में जेल में बंद राम रहीम पर शुक्रवार को पत्रकार राम चंद्र छत्रपति हत्याकांड मामले में विशेष सीबीआई कोर्ट में फैसला आएगा. इस मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम आरोपी हैं. इसके चलते पंचकूला में हाई अलर्ट है. यहां धारा 144 लगाई गई है. पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए हैं.
गौरतलब है कि पत्रकार राम चंद्र छत्रपति वही पत्रकार थे, जिन्होंने राम रहीम का सच पूरी दुनिया के सामने सबसे पहले लाया था. उन्होंने सिरसा में हुए दो साध्वियों के साथ हुए रेप की खबर को अपने अखबार 'पूरा सच' में छापा था. इस खबर के प्रकाशित होने के बाद राम रहीम के लोग पत्रकार राम चंद्र छत्रपति को आए दिन धमकियां देते थे. इसके बावजूद पत्रकार राम चंद्र छत्रपति निर्भीक होकर राम रहीम के खिलाफ लिखते रहे.
इसके बाद अक्टूबर 24, 2002 को पत्रकार छत्रपति पर घर के बाहर कुछ अज्ञात लोगों ने हमला किया. उनकी गोलियों से भून कर हत्या कर दी गई. पिता की हत्या के बाद उनका बेटा अंशुल न्याय के लिए जगह-जगह भटकता रहा, लेकिन आखिरकार आज इस मामले में कोर्ट फैसला सुनाने जा रहा है.
आपको बता दें कि राम रहीम द्वारा साध्वी से रेप की घटना कई दिनों तक दबी रही. इस पूरी घटना का खुलासा जिस गुमनाम चिट्ठी से हुआ वो पत्रकार छत्रपति ने अपने अखबार में प्रकाशित की थी. उस वक्त यह चिट्ठी तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, चीफ जस्टिस पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट, समेत कई संस्थानों में भेजी थी.
तीन पेज की चिट्ठी हाथ आने के बाद पत्रकार छत्रपति ने राम रहीम के बारे में अपने अखबार में छापा था. इसके कुछ दिन बाद ही पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इस चिट्ठी का संज्ञान लेते हुए सिरसा के डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज को इसकी जांच कराने का आदेश दिया. जिसके बाद जज ने यह जांच सीबीआई को सौंपी.
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चिट्ठी पर संज्ञान लेने के बाद दिसंबर 12, 2002 को सीबीआई की चंडीगढ़ यूनिट ने इस मामले में धारा 376, 506 और 509 के तहत मामला दर्ज करते हुए इन्वेस्टीगेशन की. फिर इस मामले में राम रहीम को जेल भी हुई.
कांग्रेस को दिल्ली में शीला दीक्षित से उम्मीद है. आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के वोट में सेंधमारी कर रखी है. खासकर दलित वोट पर आप का कब्जा है. मुस्लिम वोट कांग्रेस के साथ तभी आएगा, जब उसे लगेगा कि कांग्रेस बीजेपी को हरा सकती है. वैश्य और पंजाबी वोट ज्यादातर बीजेपी के पास है. ऐसे में शीला दीक्षित के सामने दो चुनौती है. एक तो सामाजिक समीकरण को सही करना, पुराने वोट को वापस लाना के चुनौती है.
उम्र बन रही बाधा
शीला दीक्षित के विरोध में सबसे बड़ी बाधा उनकी उम्र ही रही है. शीला इस समय 80 साल की हैं. इसके अलावा उनका स्वास्थ्य भी बेहतर नहीं रहा है. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने उन्हें अपनी पार्टी का सीएम उम्मीदवार बनाया था. हालांकि बाद में एसपी के साथ गठबंधन होने के बाद उन्होंने दावेदारी वापस ले ली थी, लेकिन तब भी उनका स्वास्थ्य उनके प्रचार में बाधक बनकर सामने आया था. ऐसे में वो प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर कितना संघर्ष करेंगी ये अहम सवाल है. हालांकि पार्टी ने तीन कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर एक अलग रणनीति अपनाई है.
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