धारधार कुल्हाड़ियां लिए भीड़ ने जब ज़ूरा कारूहिंबी के घर को घेर कर अंदर शरण लिए लोगों को बाहर निकालने की मांग की तो उस वक़्त वो बिलकुल निहत्थी थीं.
उनके पास अगर कुछ था तो जादुई शक्तियों की उनकी साख थी.
यही साख और इससे हथियारबंद लोगों के मन में पैदा हुआ वो डर ही था जिसने उन सौ से अधिक लोगों की जान बचा दी जो अपनी जान बचाने के लिए उनके घर के भीतर छिपे थे.
ये रवांडा में हुए जनसंहार के दिनों की बात है.
1994 में शुरू हुए इस नरसंहार में रवांडा के तुत्सी समुदाय के करीब आठ लाख लोग मारे गए थे. मारे गए इन लोगों में हमलावर हूतू समुदाय के उदारवादी लोग भी शामिल थे.
इन में कारूहिंबी की पहली बेटी भी थीं.
इस नरसंहार के दो दशक बाद अपने दो छोटे कमरों के घर में द इस्ट अफ़्रीकन से बात करते हुए उन्होंने कहा था. "उस नरसंहार के दौरान मैंने इंसान के दिल का कालापन देखा था." इसी घर में उन्होंने उन लोगों को छुपाया था और उनकी जान बचायी थी.
बीते सोमवार को रवांडा की राजधानी किगाली से क़रीब एक घंटे की दूरी पर पूर्व में स्थित मासूमो गांव में कारूहिंबी की मौत हो गई. किसी को नहीं पता है कि वो कितने साल की थीं.
अधिकारिक दस्तावेज़ों में उनकी उम्र 93 साल है जबकि वो अपने आप को सौ बरस से ज़्यादा का बताती थीं.
जो भी हो, लेकिन जब हूतू मिलिशिया ने उनके गांव पर हमला किया था तब वो बहुत युवा नहीं थीं.
पारंपरिक ओझा परिवार में पैदा हुईं
कारूहिंबी के बारे में जो बहुत सी कहानियां लिखी गई हैं उनके मुताबिक वो एक पारंपरिक ओझा परिवार में 1925 में पैदा हुईं थीं. जन्म का ये साल उनके अधिकारिक पहचान पत्र से लिया गया है.
ये कहा जा सकता है कि 1994 की घटनाओं के तार उनके बचपन से ही जुड़ने शुरू हो गए थे. यही वो दौर था जब रवांडा पर बेल्जियम का शासन हुआ और इस ओपनिवेशिक शक्ति ने रवांडा के लोगों को स्पष्ट रूप से बंटे हुए समूहों में बांट दिया. पहचान पत्र जारी करके लोगों को बता दिया गया कि वो हूतू हैं या तुत्सी.
कारूहिंबी का परिवार हूतू था और ये समुदाय रवांडा में बहुसंख्यक था. लेकिन अल्पसंख्यक तुत्सी समुदाय के लोगों को उच्च वर्गीय समझा जाता था और यही वजह थी कि बेल्जियम के शासनकाल में नौकरियों और व्यापार में इसी समूह का बोलबाला था.
इस बंटवारे ने दोनों समूहों के बीच तनाव भी पैदा किया. 1959 में कारुहिंबी युवा ही थीं जब तुत्सी राजा किगेरी पंचम और उनके दसियों हज़ार तुत्सी समर्थकों को पड़ोसी उगांडा में शरण लेनी पड़ी. ये रवांडा में हुई हूती क्रांति के बाद की बात है.
Monday, December 24, 2018
Sunday, December 9, 2018
10 साल बाद भारत ने ऑस्ट्रेलिया को उसी की ज़मीन पर हराया
एडिलेड में खेले गए पहले टेस्ट मैच में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 31 रनों से हरा दिया है. खेल के आख़िरी दिन ऑस्ट्रेलिया के सारे बल्लेबाज़ 291 रन पर ही आउट हो गए. इससे पहले भारत ने एडिलेड ओवल में 2003 में टेस्ट मैच जीता था.
भारत ने कभी भी एक टेस्ट सिरीज़ में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ पहला मैच नहीं जीता था. इस जीत के साथ ही यह रिकॉर्ड भी टूट गया.
भारत ने दूसरी पारी के बाद ऑस्ट्रेलिया को 323 रनों का लक्ष्य दिया था.
ऑस्ट्रेलिया की तरफ़ से एस मार्श ने दूसरी पारी में सबसे ज़्यादा 60 रन बनाए. दूसरी पारी में मार्श के अलावा किसी भी खिलाड़ी का निजी स्कोर 50 तक भी नहीं पहुंच पाया. मार्श के बाद कप्तान टिम पेन ने सबसे ज़्यादा 41 रन बनाए.
चेतेश्वर पुजारा को मैन ऑफ द मैच मिला. पुजारा ने पहली पारी में 123 और दूसरी पारी में 71 रनों की शानदार पारी खेली थी.
मैच के चौथे दिन भारत ने 307 रन बनाए थे. भारत को पहली पारी में 15 रनों की बढ़त मिली थी और इस आधार पर ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए 323 रनों का टारगेट मिला था. चौथे दिन ऑस्ट्रेलिया ने अपनी दूसरी पारी की शुरुआत की लेकिन भारतीय गेंदबाज़ों ने खेल ख़त्म होने तक चार विकेट चटका दिए थे और स्कोर 104 का था.
पाँचवे दिन ऑस्ट्रेलिया ने खेलना शुरू किया तो मोहम्मद शामी और ईशांत शर्मा ने हैंडस्कॉम्ब और ट्रैविस हेड को 14-14 रन के निजी स्कोर पर ही आउट कर दिया. बुमराह ने टिम पेन का सबसे अहम विकेट लिया. टिम पेन ने ऑस्ट्रेलिया की उम्मीद जगा दी थी, लेकिन बुमराह ने 41 रन के निजी स्कोर पर उन्हें चलता कर दिया.
इस मैच में ऋषभ पंत ने रिकॉर्ड 11 कैच लिए. पंत ने ऐसा कर जैक रसल और एबी डिविलियर्स की बराबरी कर ली है.
जीत के बाद विराट कोहली ने अपने गेंजबाज़ों की जमकर तारीफ़ की. कोहली ने कहा कि गेंदबाज़ों ने मौक़ों का फ़ायदा उठाया. इसके साथ ही कोहली ने पुजारा और रहाणे की बल्लेबाज़ी की प्रशंसा की. कोहली ने कहा कि पुजारा और रहाणे ने जीत की बुनियाद रखी दी थी. भारतीय कप्तान ने बैटिंग में मिडल ऑर्डर के बाद के प्रदर्शन पर चिंता जताई है.
इस जीत के बाद सुनील गावसकर ने कहा कि भारत ने पहली पारी में 15 रन का लीड लेकर आत्मविश्वास हासिल कर लिया था. गावसकर का मानना है कि इस हार के बाद ऑस्ट्रेलिया दबाव में होगा.
भारत ने कभी भी एक टेस्ट सिरीज़ में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ पहला मैच नहीं जीता था. इस जीत के साथ ही यह रिकॉर्ड भी टूट गया.
भारत ने दूसरी पारी के बाद ऑस्ट्रेलिया को 323 रनों का लक्ष्य दिया था.
ऑस्ट्रेलिया की तरफ़ से एस मार्श ने दूसरी पारी में सबसे ज़्यादा 60 रन बनाए. दूसरी पारी में मार्श के अलावा किसी भी खिलाड़ी का निजी स्कोर 50 तक भी नहीं पहुंच पाया. मार्श के बाद कप्तान टिम पेन ने सबसे ज़्यादा 41 रन बनाए.
चेतेश्वर पुजारा को मैन ऑफ द मैच मिला. पुजारा ने पहली पारी में 123 और दूसरी पारी में 71 रनों की शानदार पारी खेली थी.
मैच के चौथे दिन भारत ने 307 रन बनाए थे. भारत को पहली पारी में 15 रनों की बढ़त मिली थी और इस आधार पर ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए 323 रनों का टारगेट मिला था. चौथे दिन ऑस्ट्रेलिया ने अपनी दूसरी पारी की शुरुआत की लेकिन भारतीय गेंदबाज़ों ने खेल ख़त्म होने तक चार विकेट चटका दिए थे और स्कोर 104 का था.
पाँचवे दिन ऑस्ट्रेलिया ने खेलना शुरू किया तो मोहम्मद शामी और ईशांत शर्मा ने हैंडस्कॉम्ब और ट्रैविस हेड को 14-14 रन के निजी स्कोर पर ही आउट कर दिया. बुमराह ने टिम पेन का सबसे अहम विकेट लिया. टिम पेन ने ऑस्ट्रेलिया की उम्मीद जगा दी थी, लेकिन बुमराह ने 41 रन के निजी स्कोर पर उन्हें चलता कर दिया.
इस मैच में ऋषभ पंत ने रिकॉर्ड 11 कैच लिए. पंत ने ऐसा कर जैक रसल और एबी डिविलियर्स की बराबरी कर ली है.
जीत के बाद विराट कोहली ने अपने गेंजबाज़ों की जमकर तारीफ़ की. कोहली ने कहा कि गेंदबाज़ों ने मौक़ों का फ़ायदा उठाया. इसके साथ ही कोहली ने पुजारा और रहाणे की बल्लेबाज़ी की प्रशंसा की. कोहली ने कहा कि पुजारा और रहाणे ने जीत की बुनियाद रखी दी थी. भारतीय कप्तान ने बैटिंग में मिडल ऑर्डर के बाद के प्रदर्शन पर चिंता जताई है.
इस जीत के बाद सुनील गावसकर ने कहा कि भारत ने पहली पारी में 15 रन का लीड लेकर आत्मविश्वास हासिल कर लिया था. गावसकर का मानना है कि इस हार के बाद ऑस्ट्रेलिया दबाव में होगा.
Friday, December 7, 2018
नई सरकार के गठन में 4 दिन शेष, सभी दलों के दावे और 3 समीकरण चर्चा में
प्रदेश में नई सरकार कौन बनाएगा इसका पता चलने में अब सिर्फ 4 दिन शेष हैं। नतीजे आने से पहले सभी दलों के दावे चरम पर हैं और 3 समीकरण प्रदेश में चर्चा में हैं। भाजपा को उम्मीद है कि जोगी जितने वोट काटेंगे पार्टी उतनी ही मजबूत होगी। दूसरी ओर कांग्रेस को भरोसा है कि कर्जमाफी और बदलाव के नारे ने उसे बढ़त दिला दी है।
इन दोनों से इतर जोगी और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) गठबंधन जतीय समीकरण के सहारे तीसरी शक्ति बन खुद को सत्ता के केंद्र के रूप में देख रहा है। 2013 की तुलना में इस बार 0.80 फीसदी कम वोटिंग हुई। 2013 में सिर्फ 0.75 फीसदी ज्यादा वोट पाकर भाजपा तीसरी बार सत्ता में काबिज हुई थी। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस की उम्मीदें जोगी कांग्रेस-बसपा गठबंधन, छोटे दल और निर्दलियों को मिलने वाले वोटों के प्रतिशत पर टिकी हुई हैं। इस वजह से राजनीतिक दल पिछले तीनों चुनाव के आंकड़ों को सामने रखकर माथापच्ची तो कर रहे हैं, लेकिन किसी नतीजे तक नहीं पहुंच पा रहे।
भाजपा की उम्मीद: जोगी जितने वोट काटेंगे वो उतनी मजबूती से खड़ी होगी
सत्ताधारी दल भाजपा 15 साल में किए विकास आैर मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह के चेहरे के साथ मैदान में उतरी। उज्जवला, मुफ्त मोबाइल, स्मार्ट कार्ड से इलाज के अलावा सभी वर्ग के लोगों के लिए चलाई जा रही योजनाआें का पार्टी ने चुनाव के दौरान जमकर प्रचार किया। भाजपा नेताआें के अनुसार शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली के क्षेत्र में किए गए कार्यों को लेकर वे लोगों के बीच गए। भाजपा नेताओं का मानना है कि मतदाता कांग्रेस और जोगी कांग्रेस के नेताओं के बारे में अच्छी तरह जानते हैं। इन सभी का भाजपा को लाभ मिलेगा।
जोगी कांग्रेस तो कांग्रेस से निकला धड़ा है, इसलिए कांग्रेस को ही नुकसान पहुंचाएगा। कांग्रेसियों की आपसी लड़ाई का भी हमें लाभ होगा। बसपा-जोगी कांग्रेस के सामाजिक समीकरणों से भी भाजपा को ही लाभ होना है। -सच्चिदानंद उपासने, भाजपा प्रवक्ता
कांग्रेस को भरोसा: कर्जमाफी और बदलाव के नारे ने बढ़त दिला दी है
प्रदेश में 15 साल से सत्ता से बाहर चल रही कांग्रेस को इस बार जीत की पूरी उम्मीद है। पार्टी नेताओं का दावा है कि किसानों की कर्ज माफी और बदलाव की हवा के कारण इस बार कांग्रेस सत्ता हासिल करेगी। इसके अलावा भाजपा सरकार के खिलाफ एंटीइंकमबेंसी, भ्रष्टाचार, धान-किसान, महंगाई, बेरोजगारी और शराबबंदी जैसे मुद्दों से भी पार्टी को आशाएं हैं। प्रदेश का एेसा कोई विभाग नहीं है जहां रिश्वतखोरी न हो। इन सब बातों से पार्टी को फायदा मिलेगा।
हम 5 साल से सड़क से सदन तक लोगों के मुद्दों के लेकर लड़ते रहे हैं। किसान कर्जमाफी, बिजली बिल हाफ आैर दारु भट्टी साफ नारे के साथ लोग हमसे जुड़े। इसलिए हम पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बना रहे हैं। -भूपेश बघेल, पीसीसी चीफ
जोगी-बसपा गठबंधन: जातीय समीकरण और स्थानीयता के बूते किंगमेकर की आस
जोगी कांग्रेस-बसपा का गठबंधन स्थानीयता और जातीय समीकरणों को ताकत मान रहा है। गठबंधन को उम्मीद है कि किंगमेकर वही होंगे। जहां तक बसपा का सवाल है, पिछले चुनावों में राज्य की 15 से ज्यादा सीटों पर उसके उम्मीदवारों को जितने वोट मिले, उतने से कांग्रेस या भाजपा उम्मीदवार की हार हुई थी। उधर, किसान कर्जमाफी और युवाओं को रोजगार देने के वादे के साथ मैदान उतरी जोगी कांग्रेस का दावा है कि ये मुद्दे जीत दिला रहे हैं, इसीलिए गठबंधन को लगता है कि वो तीसरी शक्ति को रूप में स्थापित होगा।
इन दोनों से इतर जोगी और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) गठबंधन जतीय समीकरण के सहारे तीसरी शक्ति बन खुद को सत्ता के केंद्र के रूप में देख रहा है। 2013 की तुलना में इस बार 0.80 फीसदी कम वोटिंग हुई। 2013 में सिर्फ 0.75 फीसदी ज्यादा वोट पाकर भाजपा तीसरी बार सत्ता में काबिज हुई थी। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस की उम्मीदें जोगी कांग्रेस-बसपा गठबंधन, छोटे दल और निर्दलियों को मिलने वाले वोटों के प्रतिशत पर टिकी हुई हैं। इस वजह से राजनीतिक दल पिछले तीनों चुनाव के आंकड़ों को सामने रखकर माथापच्ची तो कर रहे हैं, लेकिन किसी नतीजे तक नहीं पहुंच पा रहे।
भाजपा की उम्मीद: जोगी जितने वोट काटेंगे वो उतनी मजबूती से खड़ी होगी
सत्ताधारी दल भाजपा 15 साल में किए विकास आैर मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह के चेहरे के साथ मैदान में उतरी। उज्जवला, मुफ्त मोबाइल, स्मार्ट कार्ड से इलाज के अलावा सभी वर्ग के लोगों के लिए चलाई जा रही योजनाआें का पार्टी ने चुनाव के दौरान जमकर प्रचार किया। भाजपा नेताआें के अनुसार शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली के क्षेत्र में किए गए कार्यों को लेकर वे लोगों के बीच गए। भाजपा नेताओं का मानना है कि मतदाता कांग्रेस और जोगी कांग्रेस के नेताओं के बारे में अच्छी तरह जानते हैं। इन सभी का भाजपा को लाभ मिलेगा।
जोगी कांग्रेस तो कांग्रेस से निकला धड़ा है, इसलिए कांग्रेस को ही नुकसान पहुंचाएगा। कांग्रेसियों की आपसी लड़ाई का भी हमें लाभ होगा। बसपा-जोगी कांग्रेस के सामाजिक समीकरणों से भी भाजपा को ही लाभ होना है। -सच्चिदानंद उपासने, भाजपा प्रवक्ता
कांग्रेस को भरोसा: कर्जमाफी और बदलाव के नारे ने बढ़त दिला दी है
प्रदेश में 15 साल से सत्ता से बाहर चल रही कांग्रेस को इस बार जीत की पूरी उम्मीद है। पार्टी नेताओं का दावा है कि किसानों की कर्ज माफी और बदलाव की हवा के कारण इस बार कांग्रेस सत्ता हासिल करेगी। इसके अलावा भाजपा सरकार के खिलाफ एंटीइंकमबेंसी, भ्रष्टाचार, धान-किसान, महंगाई, बेरोजगारी और शराबबंदी जैसे मुद्दों से भी पार्टी को आशाएं हैं। प्रदेश का एेसा कोई विभाग नहीं है जहां रिश्वतखोरी न हो। इन सब बातों से पार्टी को फायदा मिलेगा।
हम 5 साल से सड़क से सदन तक लोगों के मुद्दों के लेकर लड़ते रहे हैं। किसान कर्जमाफी, बिजली बिल हाफ आैर दारु भट्टी साफ नारे के साथ लोग हमसे जुड़े। इसलिए हम पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बना रहे हैं। -भूपेश बघेल, पीसीसी चीफ
जोगी-बसपा गठबंधन: जातीय समीकरण और स्थानीयता के बूते किंगमेकर की आस
जोगी कांग्रेस-बसपा का गठबंधन स्थानीयता और जातीय समीकरणों को ताकत मान रहा है। गठबंधन को उम्मीद है कि किंगमेकर वही होंगे। जहां तक बसपा का सवाल है, पिछले चुनावों में राज्य की 15 से ज्यादा सीटों पर उसके उम्मीदवारों को जितने वोट मिले, उतने से कांग्रेस या भाजपा उम्मीदवार की हार हुई थी। उधर, किसान कर्जमाफी और युवाओं को रोजगार देने के वादे के साथ मैदान उतरी जोगी कांग्रेस का दावा है कि ये मुद्दे जीत दिला रहे हैं, इसीलिए गठबंधन को लगता है कि वो तीसरी शक्ति को रूप में स्थापित होगा।
Thursday, November 15, 2018
阿尔巴尼亚:世界上最“碉堡”的国家
这是一个春天的早晨,太阳高照,已经感到热了。我走在奥里库姆(Orikum)的废墟中。奥里库姆是罗马统治时期的一个定居点,位于阿尔巴尼亚境内亚得里亚海岸宽阔的发罗拉湾南端。这里很好地保留了罗马统治时期的记忆,甚至一座剧院的很多石砌台阶还原封不动。
但这并不是我来这里的原因。
在奥里库姆遥遥欲坠的建筑群脚下,还有另外一片废墟。它们的历史不到半个世纪,名气也要小得多。这片废墟是附近帕夏李曼(Pasha Liman)海军基地昔日的营房。从堤道的另一边就能看到那个基地。
我的导游乔希(Elton Caushi)开玩笑说,我们对有2000年历史的遗迹视而不见,却对只有40年历史的废墟情有独钟。
在海军营房废墟和堤道之间,分布着几处低矮的灰色碉堡。每处掩体的高度和宽度只够容纳两个人,墙壁上方是一个圆形的穹顶,建于20世纪70年代。当时,阿尔巴尼亚是全世界最受孤立的国家之一。
修建碉堡是霍查的主意。霍查曾是一名游击队员,冷战后统治阿尔巴尼亚长达40年。他领导下的政权残酷,荒诞。霍查认定,从邻国南斯拉夫到希腊、北约,甚至包括他在苏联的前盟友,所有人都想侵略他的国家。于是,霍查启动了一项大修碉堡的计划。
这些眺望着发罗拉湾的碉堡,只是钢筋和混凝土建筑物的冰山一角。从与黑山接壤的北部边界到与希腊科孚岛隔海相望的海滩,阿尔巴尼亚到处都是在猜疑引发的修建热潮中建成的碉堡。这种碉堡不止几百座,甚至不止几千座。据保守估计,完工的碉堡数量超过17万座。
今天,它们依旧零散分布在乡间,或是俯瞰着山谷,或是默默守卫着十字路口和公路,又或是像令人毛骨悚然的雕像一样排列在空无一人的海滩上。它们的影响不仅仅是物质上的。
外界认为,一座碉堡的造价与一套两居室公寓相当。此外,修建碉堡无疑导致了阿尔巴尼亚沦为欧洲最贫穷的国家之一,这种影响一直延续至今。
时刻准备着
霍查因为要求阿尔巴尼亚人民都必须"时刻准备着"而出名。这种心态在一定程度上源自他在第二次世界大战中的经历。
二战时,阿尔巴尼亚军队规模小,装备差。1939年,意大利法西斯入侵阿尔巴尼亚,阿尔巴尼亚军队惨败。双方开战仅5天后,战争正式结束。但抵抗法西斯的行动并没有完全结束,只是开始逐渐销声匿迹。
阿尔巴尼亚是一个多山之国,非常适合开展游击战。几百年间,阿尔巴尼亚人民以顽强抵抗侵略者而闻名于世。战争推动了阿尔巴尼亚游击战的进程,在南斯拉夫沦陷区的抵抗组织和英美盟友的帮助下,游击队开始袭击意大利和德国侵略者。在这场抵抗运动中,冲在最前面的便是霍查领导的共产党游击队员。
随着形势向有利于反法西斯同盟国的方向转变,阿尔巴尼亚的抵抗力量逐渐壮大,在丛林中的据点里积蓄力量。事实证明,这些根据地十分巩固,无法消灭。到1944年11月解放首都地拉那时,这支由共产党和民族主义者组成的草根武装力量的规模已达7万人左右。
但这并不是我来这里的原因。
在奥里库姆遥遥欲坠的建筑群脚下,还有另外一片废墟。它们的历史不到半个世纪,名气也要小得多。这片废墟是附近帕夏李曼(Pasha Liman)海军基地昔日的营房。从堤道的另一边就能看到那个基地。
我的导游乔希(Elton Caushi)开玩笑说,我们对有2000年历史的遗迹视而不见,却对只有40年历史的废墟情有独钟。
在海军营房废墟和堤道之间,分布着几处低矮的灰色碉堡。每处掩体的高度和宽度只够容纳两个人,墙壁上方是一个圆形的穹顶,建于20世纪70年代。当时,阿尔巴尼亚是全世界最受孤立的国家之一。
修建碉堡是霍查的主意。霍查曾是一名游击队员,冷战后统治阿尔巴尼亚长达40年。他领导下的政权残酷,荒诞。霍查认定,从邻国南斯拉夫到希腊、北约,甚至包括他在苏联的前盟友,所有人都想侵略他的国家。于是,霍查启动了一项大修碉堡的计划。
这些眺望着发罗拉湾的碉堡,只是钢筋和混凝土建筑物的冰山一角。从与黑山接壤的北部边界到与希腊科孚岛隔海相望的海滩,阿尔巴尼亚到处都是在猜疑引发的修建热潮中建成的碉堡。这种碉堡不止几百座,甚至不止几千座。据保守估计,完工的碉堡数量超过17万座。
今天,它们依旧零散分布在乡间,或是俯瞰着山谷,或是默默守卫着十字路口和公路,又或是像令人毛骨悚然的雕像一样排列在空无一人的海滩上。它们的影响不仅仅是物质上的。
外界认为,一座碉堡的造价与一套两居室公寓相当。此外,修建碉堡无疑导致了阿尔巴尼亚沦为欧洲最贫穷的国家之一,这种影响一直延续至今。
时刻准备着
霍查因为要求阿尔巴尼亚人民都必须"时刻准备着"而出名。这种心态在一定程度上源自他在第二次世界大战中的经历。
二战时,阿尔巴尼亚军队规模小,装备差。1939年,意大利法西斯入侵阿尔巴尼亚,阿尔巴尼亚军队惨败。双方开战仅5天后,战争正式结束。但抵抗法西斯的行动并没有完全结束,只是开始逐渐销声匿迹。
阿尔巴尼亚是一个多山之国,非常适合开展游击战。几百年间,阿尔巴尼亚人民以顽强抵抗侵略者而闻名于世。战争推动了阿尔巴尼亚游击战的进程,在南斯拉夫沦陷区的抵抗组织和英美盟友的帮助下,游击队开始袭击意大利和德国侵略者。在这场抵抗运动中,冲在最前面的便是霍查领导的共产党游击队员。
随着形势向有利于反法西斯同盟国的方向转变,阿尔巴尼亚的抵抗力量逐渐壮大,在丛林中的据点里积蓄力量。事实证明,这些根据地十分巩固,无法消灭。到1944年11月解放首都地拉那时,这支由共产党和民族主义者组成的草根武装力量的规模已达7万人左右。
Subscribe to:
Posts (Atom)