Friday, January 4, 2019

छत्तीसगढ़: बघेल कराना चाहते थे कल्लूरी को बर्ख़ास्त फिर क्यों दी अहम ज़िम्मेदारी?

छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने आईपीएस अधिकारी शिवराम प्रसाद कल्लूरी को एंटी करप्शन ब्यूरो और इकनॉमिक ऑफ़ेंस विंग जैसे अहम विभाग का आईजी नियुक्त किया है.

शिवराम प्रसाद कल्लूरी भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क़रीबी माने जाते हैं और कांग्रेस पार्टी उन्हें बर्खास्त करने की मांग करती रही थी.

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी विपक्ष में रहते हुए कल्लूरी के ख़िलाफ़ लगातार लड़ाई लड़ते रहे थे. कई अवसरों पर उन्होंने कल्लूरी को जेल में डालने की मांग भी उठाई थी.

लेकिन अब उन्हीं शिवराम प्रसाद कल्लूरी की इस महत्वपूर्ण पद पर पोस्टिंग को लेकर राजनीतिक और मानवाधिकार संगठन चकित हैं.

राज्य के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने पत्रकारों से कहा है कि ये पदस्थापना मुख्यमंत्री कार्यालय से की गई है. दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी ने स्वीकार किया है कि कल्लूरी के ख़िलाफ़ गंभीर शिकायतें रही हैं.

कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता शैलेश नितिन त्रिवेदी ने बीबीसी से कहा, "बस्तर में रहते हुए एसआरपी कल्लूरी के ख़िलाफ़ कई गंभीर शिकायतें आईं और विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस पार्टी ने उन मामलों को उजागर भी किया. कांग्रेस के उठाए गए मामलों के कारण ही बस्तर में सरकारी आतंकवाद पर अंकुश लग सका. रोक लग सकी."

शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा कि शिवराम प्रसाद कल्लूरी पुलिस अधिकारी के तौर पर सेवारत हैं. इसलिए स्वाभाविक रूप से दूसरे अधिकारियों की तरह बिना किसी भेदभाव के उन्हें भी नई ज़िम्मेदारी दी गई है.

त्रिवेदी ने कहा कि कल्लूरी को कोई महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी नहीं दी गई है और बस्तर से या माओवाद के नियंत्रण से दूर रखकर उन्हें इकनॉमिक ऑफेंस विंग जैसी संस्था में तैनात किया गया है, जिसे पुलिस लूप लाइन मानती है.

लेकिन पिछली भाजपा सरकार में राज्य के गृह मंत्री रहे रामसेवक पैंकरा ने बीबीसी से कहा, "कांग्रेस सरकार निहित स्वार्थ के कारण ऐसे अफ़सरों को महत्वपूर्ण पदों पर बैठा रही है, जिससे उसके व्यक्तिगत स्वार्थ की पूर्ति हो सके."

फ़रवरी 2017 में फ़र्ज़ी मुठभेड़ व आत्मसमर्पण और मानवाधिकार हनन की कई गंभीर शिकायतों के बाद उन्हें बस्तर से हटाया गया था. उनको पुलिस मुख्यालय में तैनात किया गया था लेकिन राज्य की भाजपा सरकार ने उन्हें लंबे समय तक कोई ज़िम्मेदारी नहीं सौंपी.

मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल का कहना है कि जिस अफ़सर को भारतीय जनता पार्टी तक ने सक्रिय ड्यूटी से इसलिए दरकिनार कर दिया था क्योंकि 'स्थापित मानव अधिकार संस्थानों ने इनके कारनामों पर संदेह जताया था.' उसे लेकर सरकार का ऐसा फ़ैसला एक ग़लत सन्देश देता है कि कांग्रेस पार्टी मानवाधिकारों और ख़ास कर अभिव्यक्ति की आज़ादी जैसे मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के प्रति गंभीर नहीं है.

पीयूसीएल के अध्यक्ष डॉ. लाखन सिंह ने कहा कि कुछ महीने पहले तक वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बस्तर के आईजी शिवराम प्रसाद कल्लूरी को ताड़मेटला मुठभेड़ में हत्या और बलात्कार के आरोप में गिरफ़्तार करने की मांग कर रहे थे और आज उन्हीं का ईओडब्ल्यू और एसीबी विभागों के नए आईजी के रूप में स्वागत किया जा रहा है- जबकि ये ऐसे पद हैं जहां सत्यनिष्ठा और ईमानदारी की अत्याधिक आवश्यकता होती है.

डॉ. लाखन सिंह ने कहा कि जिस सलवा-जुडूम को सुप्रीम कोर्ट ने ग़ैर-कानूनी और ग़ैर-संवैधानिक घोषित किया था, शिवराम प्रसाद कल्लूरी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भी सलवा जुड़ूम के पक्ष में लगातार खड़े रहे.

डॉ. लाखन सिंह ने कहा, "ऐसे दागी पुलिस अफसरों की नियुक्ति को स्थगित कर, सुप्रीम कोर्ट के अवकाशप्राप्त न्यायाधीश से एक विस्तृत जांच कराके, सरकार उनकी रपट और सिफ़ारिशों के आधार पर उचित कार्रवाई करे. जांच होने तक इन पुलिस अफ़सरों को सक्रिय ड्यूटी से अलग रखा जाए."

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