Monday, December 24, 2018

'चुड़ैल' जिसने बचाई सौ से ज़्यादा लोगों की जान

धारधार कुल्हाड़ियां लिए भीड़ ने जब ज़ूरा कारूहिंबी के घर को घेर कर अंदर शरण लिए लोगों को बाहर निकालने की मांग की तो उस वक़्त वो बिलकुल निहत्थी थीं.

उनके पास अगर कुछ था तो जादुई शक्तियों की उनकी साख थी.

यही साख और इससे हथियारबंद लोगों के मन में पैदा हुआ वो डर ही था जिसने उन सौ से अधिक लोगों की जान बचा दी जो अपनी जान बचाने के लिए उनके घर के भीतर छिपे थे.

ये रवांडा में हुए जनसंहार के दिनों की बात है.

1994 में शुरू हुए इस नरसंहार में रवांडा के तुत्सी समुदाय के करीब आठ लाख लोग मारे गए थे. मारे गए इन लोगों में हमलावर हूतू समुदाय के उदारवादी लोग भी शामिल थे.

इन में कारूहिंबी की पहली बेटी भी थीं.

इस नरसंहार के दो दशक बाद अपने दो छोटे कमरों के घर में द इस्ट अफ़्रीकन से बात करते हुए उन्होंने कहा था. "उस नरसंहार के दौरान मैंने इंसान के दिल का कालापन देखा था." इसी घर में उन्होंने उन लोगों को छुपाया था और उनकी जान बचायी थी.

बीते सोमवार को रवांडा की राजधानी किगाली से क़रीब एक घंटे की दूरी पर पूर्व में स्थित मासूमो गांव में कारूहिंबी की मौत हो गई. किसी को नहीं पता है कि वो कितने साल की थीं.

अधिकारिक दस्तावेज़ों में उनकी उम्र 93 साल है जबकि वो अपने आप को सौ बरस से ज़्यादा का बताती थीं.

जो भी हो, लेकिन जब हूतू मिलिशिया ने उनके गांव पर हमला किया था तब वो बहुत युवा नहीं थीं.

पारंपरिक ओझा परिवार में पैदा हुईं
कारूहिंबी के बारे में जो बहुत सी कहानियां लिखी गई हैं उनके मुताबिक वो एक पारंपरिक ओझा परिवार में 1925 में पैदा हुईं थीं. जन्म का ये साल उनके अधिकारिक पहचान पत्र से लिया गया है.

ये कहा जा सकता है कि 1994 की घटनाओं के तार उनके बचपन से ही जुड़ने शुरू हो गए थे. यही वो दौर था जब रवांडा पर बेल्जियम का शासन हुआ और इस ओपनिवेशिक शक्ति ने रवांडा के लोगों को स्पष्ट रूप से बंटे हुए समूहों में बांट दिया. पहचान पत्र जारी करके लोगों को बता दिया गया कि वो हूतू हैं या तुत्सी.

कारूहिंबी का परिवार हूतू था और ये समुदाय रवांडा में बहुसंख्यक था. लेकिन अल्पसंख्यक तुत्सी समुदाय के लोगों को उच्च वर्गीय समझा जाता था और यही वजह थी कि बेल्जियम के शासनकाल में नौकरियों और व्यापार में इसी समूह का बोलबाला था.

इस बंटवारे ने दोनों समूहों के बीच तनाव भी पैदा किया. 1959 में कारुहिंबी युवा ही थीं जब तुत्सी राजा किगेरी पंचम और उनके दसियों हज़ार तुत्सी समर्थकों को पड़ोसी उगांडा में शरण लेनी पड़ी. ये रवांडा में हुई हूती क्रांति के बाद की बात है.

Sunday, December 9, 2018

10 साल बाद भारत ने ऑस्ट्रेलिया को उसी की ज़मीन पर हराया

एडिलेड में खेले गए पहले टेस्ट मैच में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 31 रनों से हरा दिया है. खेल के आख़िरी दिन ऑस्ट्रेलिया के सारे बल्लेबाज़ 291 रन पर ही आउट हो गए. इससे पहले भारत ने एडिलेड ओवल में 2003 में टेस्ट मैच जीता था.

भारत ने कभी भी एक टेस्ट सिरीज़ में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ पहला मैच नहीं जीता था. इस जीत के साथ ही यह रिकॉर्ड भी टूट गया.

भारत ने दूसरी पारी के बाद ऑस्ट्रेलिया को 323 रनों का लक्ष्य दिया था.

ऑस्ट्रेलिया की तरफ़ से एस मार्श ने दूसरी पारी में सबसे ज़्यादा 60 रन बनाए. दूसरी पारी में मार्श के अलावा किसी भी खिलाड़ी का निजी स्कोर 50 तक भी नहीं पहुंच पाया. मार्श के बाद कप्तान टिम पेन ने सबसे ज़्यादा 41 रन बनाए.

चेतेश्वर पुजारा को मैन ऑफ द मैच मिला. पुजारा ने पहली पारी में 123 और दूसरी पारी में 71 रनों की शानदार पारी खेली थी.

मैच के चौथे दिन भारत ने 307 रन बनाए थे. भारत को पहली पारी में 15 रनों की बढ़त मिली थी और इस आधार पर ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए 323 रनों का टारगेट मिला था. चौथे दिन ऑस्ट्रेलिया ने अपनी दूसरी पारी की शुरुआत की लेकिन भारतीय गेंदबाज़ों ने खेल ख़त्म होने तक चार विकेट चटका दिए थे और स्कोर 104 का था.

पाँचवे दिन ऑस्ट्रेलिया ने खेलना शुरू किया तो मोहम्मद शामी और ईशांत शर्मा ने हैंडस्कॉम्ब और ट्रैविस हेड को 14-14 रन के निजी स्कोर पर ही आउट कर दिया. बुमराह ने टिम पेन का सबसे अहम विकेट लिया. टिम पेन ने ऑस्ट्रेलिया की उम्मीद जगा दी थी, लेकिन बुमराह ने 41 रन के निजी स्कोर पर उन्हें चलता कर दिया.

इस मैच में ऋषभ पंत ने रिकॉर्ड 11 कैच लिए. पंत ने ऐसा कर जैक रसल और एबी डिविलियर्स की बराबरी कर ली है.

जीत के बाद विराट कोहली ने अपने गेंजबाज़ों की जमकर तारीफ़ की. कोहली ने कहा कि गेंदबाज़ों ने मौक़ों का फ़ायदा उठाया. इसके साथ ही कोहली ने पुजारा और रहाणे की बल्लेबाज़ी की प्रशंसा की. कोहली ने कहा कि पुजारा और रहाणे ने जीत की बुनियाद रखी दी थी. भारतीय कप्तान ने बैटिंग में मिडल ऑर्डर के बाद के प्रदर्शन पर चिंता जताई है.

इस जीत के बाद सुनील गावसकर ने कहा कि भारत ने पहली पारी में 15 रन का लीड लेकर आत्मविश्वास हासिल कर लिया था. गावसकर का मानना है कि इस हार के बाद ऑस्ट्रेलिया दबाव में होगा.

Friday, December 7, 2018

नई सरकार के गठन में 4 दिन शेष, सभी दलों के दावे और 3 समीकरण चर्चा में

प्रदेश में नई सरकार कौन बनाएगा इसका पता चलने में अब सिर्फ 4 दिन शेष हैं। नतीजे आने से पहले सभी दलों के दावे चरम पर हैं और 3 समीकरण प्रदेश में चर्चा में हैं। भाजपा को उम्मीद है कि जोगी जितने वोट काटेंगे पार्टी उतनी ही मजबूत होगी। दूसरी ओर कांग्रेस को भरोसा है कि कर्जमाफी और बदलाव के नारे ने उसे बढ़त दिला दी है।

इन दोनों से इतर जोगी और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) गठबंधन जतीय समीकरण के सहारे तीसरी शक्ति बन खुद को सत्ता के केंद्र के रूप में देख रहा है। 2013 की तुलना में इस बार 0.80 फीसदी कम वोटिंग हुई। 2013 में सिर्फ 0.75 फीसदी ज्यादा वोट पाकर भाजपा तीसरी बार सत्ता में काबिज हुई थी। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस की उम्मीदें जोगी कांग्रेस-बसपा गठबंधन, छोटे दल और निर्दलियों को मिलने वाले वोटों के प्रतिशत पर टिकी हुई हैं। इस वजह से राजनीतिक दल पिछले तीनों चुनाव के आंकड़ों को सामने रखकर माथापच्ची तो कर रहे हैं, लेकिन किसी नतीजे तक नहीं पहुंच पा रहे।

भाजपा की उम्मीद: जोगी जितने वोट काटेंगे वो उतनी मजबूती से खड़ी होगी

सत्ताधारी दल भाजपा 15 साल में किए विकास आैर मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह के चेहरे के साथ मैदान में उतरी। उज्जवला, मुफ्त मोबाइल, स्मार्ट कार्ड से इलाज के अलावा सभी वर्ग के लोगों के लिए चलाई जा रही योजनाआें का पार्टी ने चुनाव के दौरान जमकर प्रचार किया। भाजपा नेताआें के अनुसार शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली के क्षेत्र में किए गए कार्यों को लेकर वे लोगों के बीच गए। भाजपा नेताओं का मानना है कि मतदाता कांग्रेस और जोगी कांग्रेस के नेताओं के बारे में अच्छी तरह जानते हैं। इन सभी का भाजपा को लाभ मिलेगा।

जोगी कांग्रेस तो कांग्रेस से निकला धड़ा है, इसलिए कांग्रेस को ही नुकसान पहुंचाएगा। कांग्रेसियों की आपसी लड़ाई का भी हमें लाभ होगा। बसपा-जोगी कांग्रेस के सामाजिक समीकरणों से भी भाजपा को ही लाभ होना है। -सच्चिदानंद उपासने, भाजपा प्रवक्ता

कांग्रेस को भरोसा: कर्जमाफी और बदलाव के नारे ने बढ़त दिला दी है

प्रदेश में 15 साल से सत्ता से बाहर चल रही कांग्रेस को इस बार जीत की पूरी उम्मीद है। पार्टी नेताओं का दावा है कि किसानों की कर्ज माफी और बदलाव की हवा के कारण इस बार कांग्रेस सत्ता हासिल करेगी। इसके अलावा भाजपा सरकार के खिलाफ एंटीइंकमबेंसी, भ्रष्टाचार, धान-किसान, महंगाई, बेरोजगारी और शराबबंदी जैसे मुद्दों से भी पार्टी को आशाएं हैं। प्रदेश का एेसा कोई विभाग नहीं है जहां रिश्वतखोरी न हो। इन सब बातों से पार्टी को फायदा मिलेगा।

हम 5 साल से सड़क से सदन तक लोगों के मुद्दों के लेकर लड़ते रहे हैं। किसान कर्जमाफी, बिजली बिल हाफ आैर दारु भट्‌टी साफ नारे के साथ लोग हमसे जुड़े। इसलिए हम पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बना रहे हैं। -भूपेश बघेल, पीसीसी चीफ

जोगी-बसपा गठबंधन: जातीय समीकरण और स्थानीयता के बूते किंगमेकर की आस

जोगी कांग्रेस-बसपा का गठबंधन स्थानीयता और जातीय समीकरणों को ताकत मान रहा है। गठबंधन को  उम्मीद है कि किंगमेकर वही होंगे। जहां तक बसपा का सवाल है, पिछले चुनावों में राज्य की 15 से ज्यादा सीटों पर उसके उम्मीदवारों को जितने वोट मिले, उतने से कांग्रेस या भाजपा उम्मीदवार की हार हुई थी। उधर, किसान कर्जमाफी और युवाओं को रोजगार देने के वादे के साथ मैदान उतरी जोगी कांग्रेस का दावा है कि ये मुद्दे जीत दिला रहे हैं, इसीलिए गठबंधन को लगता है कि वो तीसरी शक्ति को रूप में स्थापित होगा।